भारतीय सेना ने देश में बना ताकतवर ‘रुद्रास्त्र ड्रोन’ सफलतापूर्वक टेस्ट किया है। यह ड्रोन 170 किलोमीटर तक उड़कर दुश्मन के ठिकानों को आसानी से तबाह कर सकता है। इसमें कई हाईटेक खूबियां हैं, जो इसे बाकी ड्रोन से अलग बनाती हैं। आइए जानते हैं रुद्रास्त्र की ताकत और यह कैसे दुश्मन को करारा जवाब देने में मदद करेगा।

- स्वदेशी तकनीक से बना ‘रुद्रास्त्र’ UAV: आत्मनिर्भर भारत की ओर एक और मजबूत कदम
- ‘रुद्रास्त्र’ ने भरी लगभग 1.5 घंटे की उड़ान: दिखाई अपराजेय सटीकता
पोखरण रेंज में 170 किमी तक लक्ष्य भेदने में रुद्रास्त्र ड्रोन सफल
भारतीय सेना ने जैसलमेर के पोखरण फायरिंग रेंज में वर्टिकल टेक-ऑफ और लैंडिंग (VTOL) ड्रोन ‘रुद्रास्त्र’ का सफल परीक्षण किया है। यह ट्रायल ड्रोन की ताकत को परखने के लिए किया गया, जो पूरी तरह सफल रहा। यह स्वदेशी ड्रोन 170 किलोमीटर तक उड़ान भरकर दुश्मन के ठिकानों पर सटीक हमला करने में सक्षम है। रुद्रास्त्र का इस्तेमाल दुश्मन की फायरिंग पोजिशन और ठिकानों को नष्ट करने के लिए किया जा सकता है। हाल ही में पाकिस्तान के साथ तनाव के दौरान ड्रोन हमलों में बढ़ोतरी देखी गई थी, ऐसे में भारत ने अपनी ड्रोन ताकत को और मजबूत करने की दिशा में यह बड़ा कदम उठाया है।
रुद्रास्त्र को कई मामलों में एक बेहद शक्तिशाली ड्रोन माना जा रहा है। इसकी खूबियां ही इसे खास बनाती हैं। ‘रुद्रास्त्र’ की एक बड़ी विशेषता यह है कि यह दुश्मन और उसके ठिकानों की लाइव वीडियो सेना तक सीधे भेज सकता है, जिससे जमीनी हालात की सटीक जानकारी मिलती है।
रुद्रास्त्र कैसे दुश्मन के ठिकानों पर मचाएगा तबाही?
रुद्रास्त्र ड्रोन में एक खास गाइडेड वॉरहेड लगाया गया है, जो दुश्मन की गतिविधियों की लाइव जानकारी देता है। यह हाईटेक सिस्टम ड्रोन को दुश्मन की फायरिंग पोजिशन और तोपों की सटीक लोकेशन बताता है। इतना ही नहीं, यह ड्रोन खुद ही वीडियो भेजने के बाद ऑटोमेटिक अपनी लॉन्चिंग पोजिशन में आ जाता है।
जैसे ही दुश्मन का ठिकाना तय होता है, रुद्रास्त्र ड्रोन हवा में उड़ते हुए अपने टार्गेट पर बम गिराता है। ये बम ज़मीन से कुछ ऊंचाई पर ही फट जाते हैं, जिससे ऊपर से लेकर नीचे तक पूरा इलाका तबाह हो जाता है। इस तरह यह ड्रोन दुश्मन के अड्डे को पूरी तरह नष्ट करने में सक्षम है।
क्यों बनाया जा रहा है रुद्रास्त्र ड्रोन?
भारतीय सेना ऐसे कई स्वदेशी ड्रोन खरीदने की योजना बना रही है ताकि जंग के समय दुश्मन की फायरिंग पोजिशन और तोपों की सही जानकारी तुरंत मिल सके। इसी मकसद से ‘रुद्रास्त्र’ जैसे ड्रोन तैयार किए जा रहे हैं, जिन्हें दुश्मन के इलाकों तक भेजकर वहां सटीक हमला किया जा सके। इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, सेना ने रुद्रास्त्र बनाने वाली कंपनी को बुलाया है ताकि उसकी तकनीक और सिस्टम को सेना की ज़रूरतों के हिसाब से जांचा और परखा जा सके।
बुधवार को सोलर एयरोस्पेस एंड डिफेंस लिमिटेड (SDAL) ने इस ड्रोन का ट्रायल सफलतापूर्वक पूरा किया। बताया जा रहा है कि इसे इस तरह से डिजाइन किया गया है कि बॉर्डर पर अगर जंग जैसे हालात बनें तो यह दुश्मन को कमजोर करने में बड़ी भूमिका निभा सके।
अब सेना ऐसे एडवांस हथियारों पर ज्यादा भरोसा कर रही है जो 50 से 100 किलोमीटर दूर तक दुश्मन के इलाके में तबाही मचा सकें और मिशन को पूरी तरह सफल बना सकें। इसकी मदद से आतंकवादियों के ठिकानों को भी सटीकता से तबाह किया जा सकेगा
भारत की बढ़ती ड्रोन ताकत
भारत के पास कई तरह के आधुनिक ड्रोन मौजूद हैं। इनमें कुछ ड्रोन भारत में ही विकसित किए गए हैं, जबकि कुछ इजराइल जैसे देशों से आयात किए गए हैं।स्वदेशी ड्रोन में रुस्तम, रुस्तम-2, निशांत और गगन जैसे ड्रोन शामिल हैं, जो निगरानी और मिशन ऑपरेशन में बेहद काम आते हैं। वहीं, हेरॉन और हर्मीस 900 जैसे ड्रोन इजराइल से खरीदे गए हैं। खास बात यह है कि हेरॉन ड्रोन का इस्तेमाल भारत सर्जिकल स्ट्राइक जैसे ऑपरेशनों में भी कर सकता है।
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