केदारनाथ हेलिकॉप्टर हादसा: आर्यन एविएशन का हेलिकॉप्टर केदारनाथ से गुप्तकाशी के लिए उड़ा था। उसमें पायलट समेत 7 लोग थे।

- केदारनाथ के पास हेलिकॉप्टर हादसा, 7 लोगों की मौत
- खराब मौसम और तकनीकी खराबी मानी जा रही है वजह
- चारधाम यात्रा के दौरान पहले भी हो चुके हैं कई हादसे
केदारनाथ हेलिकॉप्टर हादसा 2025: गुप्तकाशी रूट पर 7 लोगों की जान गई
उत्तराखंड के केदारनाथ से गुप्तकाशी जा रहा एक हेलिकॉप्टर बीच रास्ते में जंगल में गिरकर हादसे का शिकार हो गया। इस दर्दनाक हादसे में पायलट समेत सभी सात लोगों की मौत हो गई। यह हेलिकॉप्टर आर्यन एविएशन कंपनी का था और करीब 10 मिनट की छोटी यात्रा पर था। हादसा गौरीकुंड और सोनप्रयाग के बीच सुबह करीब 5:20 बजे हुआ।
उत्तराखंड नागरिक उड्डयन विकास प्राधिकरण (UCADA) के मुताबिक, हेलिकॉप्टर में कुल 7 लोग सवार थे – जिनमें 6 तीर्थयात्री (5 बड़े और 1 बच्चा) और 1 पायलट शामिल थे। सभी श्रद्धालु अलग-अलग राज्यों – उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और गुजरात से थे।
हादसे की वजह: खराब मौसम और तकनीकी खराबी
बताया जा रहा है कि इस दुखद केदारनाथ हेलिकॉप्टर हादसा की वजह तकनीकी खराबी और खराब मौसम थी। हेलिकॉप्टर ने जैसे ही गुप्तकाशी के लिए उड़ान भरी, कुछ ही मिनटों में उसका संपर्क टूट गया, और वह जंगल में जाकर गिर गया। हेलिकॉप्टर इतनी तेजी से गिरा कि मौके पर ही सभी लोगों की मौत हो गई।
स्थानीय ग्रामीणों ने देखा हादसे का मंजर, तुरंत दी प्रशासन को सूचना
हादसे की जानकारी उस वक्त सामने आई जब कुछ स्थानीय ग्रामीण अपने मवेशियों के लिए चारा इकट्ठा करने जंगल की ओर गए थे। उन्होंने हेलिकॉप्टर का मलबा देखा और तुरंत प्रशासन को सूचना दी।
घटना की सूचना मिलते ही राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) और राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF) की टीमें तुरंत मौके पर पहुंचीं और राहत एवं बचाव कार्य शुरू कर दिया गया है। घटना की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने जांच के आदेश भी दे दिए हैं।
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हादसे पर जताया दुख
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने केदारनाथ हेलिकॉप्टर हादसा की जानकारी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर साझा की। उन्होंने इस हादसे को बेहद दुखद बताया और सभी यात्रियों के सुरक्षित और स्वस्थ होने की प्रार्थना की।
मुख्यमंत्री ने लिखा, “रुद्रप्रयाग जिले में एक हेलीकॉप्टर दुर्घटना की अत्यंत पीड़ादायक खबर मिली है। राहत और बचाव कार्य तेजी से जारी हैं। मौके पर SDRF, स्थानीय प्रशासन और अन्य टीमें पहुंच चुकी हैं और राहत कार्यों में जुटी हुई हैं।”
6 हफ्तों में 5 हादसे, केदारनाथ हेलिकॉप्टर सेवाओं पर उठे सवाल
2 मई को हिमालय के प्रसिद्ध तीर्थस्थल केदारनाथ धाम के कपाट खुलने के बाद से यह अब तक की पांचवीं केदारनाथ हेलिकॉप्टर हादसा है, जिससे तीर्थयात्रियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।
इससे पहले 7 जून को एक बड़ा हादसा टल गया था, जब केदारनाथ जा रहे एक हेलिकॉप्टर में टेक-ऑफ के दौरान तकनीकी खराबी आ गई थी। मजबूरी में पायलट को उत्तराखंड के एक हाईवे पर इमरजेंसी लैंडिंग करनी पड़ी। यह हेलिकॉप्टर खतरनाक तरीके से आसपास की इमारतों के बहुत पास आ गया था, और इसका टेल रोटर एक खड़ी कार से टकरा गया था। सौभाग्य से हेलिकॉप्टर में सवार सभी पांच तीर्थयात्री सुरक्षित बाहर निकल आए, जबकि पायलट को मामूली चोटें आईं।
हेलिकॉप्टर की उड़ानों की संख्या में की गई कटौती
केदारनाथ यात्रा के दौरान लगातार हो रहे हादसों को देखते हुए नागर विमानन महानिदेशालय (DGCA) ने सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए बड़ा कदम उठाया है। अब केदारनाथ हेलिकॉप्टर हादसा जैसे मामलों से बचाव के लिए रोजाना उड़ानों की संख्या में कटौती की गई है।
मिली जानकारी के मुताबिक, पहले जहां रोजाना औसतन 200 से 250 उड़ानें होती थीं, अब उनमें से 60 फेरे कम कर दिए गए हैं।
नए नियमों के तहत, गुप्तकाशी से एक घंटे में सिर्फ 2 उड़ानों की अनुमति होगी। इसका मतलब है कि पूरे दिन (8 घंटे में) कुल 16 बार ही हेलिकॉप्टर उड़ सकेंगे। यह फैसला तीर्थयात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लिया गया है, ताकि उड़ानों की निगरानी बेहतर तरीके से हो सके और तकनीकी जांच में कोई चूक न हो।
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