पुरी के श्रीजगन्नाथ मंदिर में भगवान जगन्नाथ स्नान पूर्णिमा 2025 के अवसर पर भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा का 108 कलशों से हुआ दिव्य स्नान। जानें इस परंपरा का महत्व और जगन्नाथ रथयात्रा 2025 की तैयारियां।

भगवान जगन्नाथ स्नान पूर्णिमा 2025: स्वर्ण कलश से महाप्रभु का हुआ दिव्य अभिषेक
पुरी के श्रीजगन्नाथ मंदिर में बुधवार को भगवान जगन्नाथ स्नान पूर्णिमा 2025 का त्योहार धूमधाम से मनाया गया। इस खास मौके पर बहुत बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। भगवान जगन्नाथ, भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के विग्रहों को 108 घड़ों में भरे सुगंधित पानी से सोने के कलश के जरिए स्नान कराया गया। पूरा मंदिर परिसर ‘जय जगन्नाथ’ के नारों से गूंजता रहा। ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी भी मंदिर पहुंचे, दर्शन किए और पूजा में हिस्सा लिया।
देवस्नान पूर्णिमा का महत्व और रथयात्रा से संबंध
भगवान जगन्नाथ स्नान पूर्णिमा 2025: भगवान जगन्नाथ का प्रतीक रूप में जन्मदिन माना जाता है। इस दिन साल में पहली बार भगवान अपने भक्तों के सामने सार्वजनिक रूप से दर्शन देते हैं। इस परंपरा का ज़िक्र स्कंद पुराण और श्रीमंदिर की परंपरागत पुस्तक ‘मदल पंजी’ में भी किया गया है। यह दिन जगन्नाथ रथयात्रा 2025 की आध्यात्मिक शुरुआत भी मानी जाती है।
बुधवार सुबह 5:32 बजे पवित्र अनुष्ठान मंगलाचरण के साथ शुरू हुआ। इसके बाद भगवान जगन्नाथ, बलभद्र, सुभद्रा और सुदर्शन चक्र को ढोल-नगाड़ों और ‘जय जगन्नाथ’ के नारों के साथ स्नान मंडप तक ले जाया गया। वहां सभी विग्रहों को विशेष आसनों पर बैठाया गया। फिर सुगंधित जल से स्नान कराने का शुभ काम शुरू हुआ।
108 कलशों से स्नान: जगन्नाथ रथयात्रा 2025 से पहले की पारंपरिक रस्म
मंदिर परिसर में बने पवित्र सुनकुआ (स्वर्ण कुएं) से जल लाया गया, जिसमें गंगाजल, चंदन, कपूर और फूलों को मिलाकर 108 कलशों में भरा गया। फिर भगवान जगन्नाथ, बलभद्र, सुभद्रा और सुदर्शन चक्र को श्रद्धा और विधि-विधान से स्नान कराया गया। इस पवित्र स्नान की परंपरा के साथ ही पुरी में जगन्नाथ रथयात्रा 2025 की तैयारियां भी आरंभ हो जाती हैं, जिससे पूरे शहर में भक्तिमय वातावरण बन जाता है।
जगन्नाथ रथयात्रा 2025 की तारीख, परंपरा और उत्साह
हर वर्ष रथयात्रा आषाढ़ शुक्ल द्वितीया को होती है। इस बार यह 27 जून 2025 को निकलेगी। भगवान जगन्नाथ को नंदिघोष रथ, बलभद्र को तालध्वज और सुभद्रा को देवदलना रथ में विराजमान कर गुंडिचा मंदिर तक ले जाया जाएगा।

महाप्रभु अब 15 दिन बाद, जगन्नाथ रथयात्रा 2025 के दिन यानी 27 जून को नवयुवक के रूप में भक्तों को दर्शन देंगे। मान्यता है कि 108 कलशों से स्नान कराने के बाद भगवान अस्वस्थ हो जाते हैं, और उन्हें ‘अनवसर गृह’ में आराम करने दिया जाता है। इस दौरान जड़ी-बूटियों, आयुर्वेदिक औषधियों और फल-भोग के माध्यम से भगवान का उपचार होता है। फिर रथयात्रा के दिन वे स्वस्थ होकर भक्तों को दर्शन देते हैं।
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