Hypersonic Glide Missile: भारत की हाइपरसोनिक ग्लाइड मिसाइल आने वाले 2 से 3 सालों में सेना का हिस्सा बन सकती है। यह मिसाइल इतनी तेज होगी कि कोई भी रडार इसे पकड़ नहीं पाएगा। यह जानकारी रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) ने दी है।

- आवाज़ से पांच गुना तेज होगी यह मिसाइल
- इसकी पहुंच में पूरा पाकिस्तान और आधा चीन आ जाएगा
- दुश्मन को पता चलने से पहले ही हमला कर देगी
- DRDO का दावा – 2 से 3 साल में यह ताकतवर मिसाइल सेना में शामिल होगी
DRDO ने बताया कि यह मिसाइल आवाज़ की गति से करीब 5 गुना ज्यादा तेज होगी। यह पहली बार है जब भारत ने आधिकारिक तौर पर कहा है कि इस मिसाइल को सेना में जल्द शामिल किया जाएगा। इसकी मारक क्षमता इतनी ज्यादा होगी कि पूरा पाकिस्तान और आधा चीन इसकी रेंज में आ जाएगा।
Hypersonic Glide Missile: भारत की हाइपरसोनिक ग्लाइड मिसाइल में हो रहा तेज़ी से विकास, जल्द होगा आखिरी परीक्षण।
डीआरडीओ प्रमुख डॉ. समीर वी. कामत ने एक इंटरव्यू में बताया कि भारत हाइपरसोनिक मिसाइल तकनीक पर तेज़ी से काम कर रहा है। उन्होंने कहा, “हमने इस दिशा में शुरुआती सफलता पा ली है। आने वाले 2 से 3 सालों में इसका अंतिम परीक्षण हो जाएगा, और इसके बाद इसे भारतीय सेना में शामिल कर लिया जाएगा।”
हाइपरसोनिक ग्लाइड मिसाइल की रफ्तार है चौंकाने वाली!
Hypersonic Glide Missile: भारत की हाइपरसोनिक ग्लाइड मिसाइल की गति का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जहां एक आम यात्री विमान को भारत से अमेरिका की करीब 12,500 किलोमीटर दूरी तय करने में 16 घंटे से ज्यादा का वक्त लगता है, वहीं यह मिसाइल यही दूरी महज दो घंटे से थोड़ा ज्यादा समय में पूरी कर सकती है।
इतनी तेज रफ्तार की वजह से कोई भी रडार इसे पकड़ नहीं पाता। दुश्मन को कुछ समझ में आए उससे पहले ही यह मिसाइल अपने लक्ष्य को तबाह कर देती है।
स्वदेशी तकनीक से बनी भारत की हाइपरसोनिक ग्लाइड मिसाइल, स्क्रैमजेट इंजन से लैस
भारत की यह हाइपरसोनिक मिसाइल ‘हाइपरसोनिक टेक्नोलॉजी डेमॉन्स्ट्रेटर व्हीकल’ (HSTDV) पर आधारित है, जिसका सफल परीक्षण 2020 में ही हो चुका है। इसके बाद पिछले साल नवंबर में ओडिशा से डीआरडीओ ने लंबी दूरी की हाइपरसोनिक मिसाइल का भी सफल परीक्षण किया था।
हाल ही में डीआरडीओ ने इस मिसाइल के लिए 1000 सेकेंड तक स्क्रैमजेट इंजन का परीक्षण भी सफलतापूर्वक पूरा किया। यह खास इंजन हवा से ऑक्सीजन खींचकर ईंधन जलाता है और पूरी तरह स्वदेशी तकनीक से तैयार किया गया है।
मिसाइल की विशेषताएं
- 6000 किमी प्रति घंटा से अधिक की रफ्तार
- 2,000 किलोमीटर तक मारक क्षमता
यह एक क्रूज मिसाइल है, जो बेहद कम ऊंचाई पर बेहद तेज़ रफ्तार से उड़ान भरती है, जिससे कोई भी रडार इसे पकड़ नहीं सकता, और इसलिए इसे रोकना या नष्ट करना भी लगभग नामुमकिन है।
दुनिया में सिर्फ रूस, चीन, अमेरिका और भारत ही ऐसे देश हैं जो हाइपरसोनिक मिसाइल तकनीक पर काम कर रहे हैं। रूस ने यूक्रेन युद्ध के दौरान इस मिसाइल के इस्तेमाल का दावा किया था, लेकिन पश्चिमी देशों के रक्षा विशेषज्ञों ने उस दावे को संदेह से देखा।
इस एडवांस्ड मिसाइल तकनीक में भारत अमेरिका से आगे निकल सकता है
वहीं, चीन और अमेरिका ने भी अब तक इस तकनीक पर कोई स्पष्ट या आधिकारिक जानकारी साझा नहीं की है। ऐसे में अगर भारत अगले दो से तीन सालों में भारत की हाइपरसोनिक ग्लाइड मिसाइल को सेना में शामिल करने में सफल हो जाता है, तो वह इस अत्याधुनिक तकनीक में दुनिया के अग्रणी देशों में शामिल हो जाएगा, और संभवतः उन्हें भी पीछे छोड़ देगा।
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