Saiyaara Review: नेपो किड होकर भी छा गए अहान, जानें क्यों देखनी चाहिए ये फिल्म

Saiyaara Review: नेपो किड होने के बावजूद कैसे जीता अहान ने दिल? और क्यों अनीत बनीं इस फिल्म की जान? जानिए पूरी सच्चाई इस रिव्यू में।


Saiyaara Review: नेपो किड होकर भी छा गए अहान, जानें क्यों देखनी चाहिए ये फिल्म
Saiyaara Review

Highlight

  • अहान पांडे और अनीत पड्डा की पहली फिल्म, लेकिन परफॉर्मेंस दिल जीतने वाली।
  • मोहित सूरी का म्यूजिकल टच और इमोशनल कहानी फिर छू जाती है दिल।
  •  ‘सैयारा’ शब्द का मतलब और फिल्म का मैसेज दर्शकों को भावुक कर देता है।

 

फरवरी का महीना भले ही अभी दूर हो, लेकिन सिनेमा घरों में रोमांटिक फिल्मों का माहौल फिर से बन गया है। हाल ही में ‘मेट्रो… इन दिनों’ जैसी फिल्म ने लोगों का दिल छू लिया। अब एक और नई म्यूजिकल लव स्टोरी बड़े पर्दे पर रिलीज हो चुकी है। इस फिल्म में प्यार, इमोशन और बढ़िया म्यूजिक का खूबसूरत मेल देखने को मिलता है। खास बात यह है कि इस फिल्म से दो नए कलाकार पहली बार बॉलीवुड में कदम रख रहे हैं। इनकी एक्टिंग और केमिस्ट्री दर्शकों को काफी पसंद आ रही है। यह फिल्म खास तौर पर युवा दर्शकों को ध्यान में रखकर बनाई गई है, जो रोमांटिक कहानियों को पसंद करते हैं।

प्यार और सपनों के बीच फंसी एक दिल छू लेने वाली कहानी

कहानी की शुरुआत होती है वाणी बत्रा (अनीत पड्डा) से, जिसकी हाल ही में शादी टूट गई है। शादी के साथ-साथ उसका दिल भी टूट चुका है। अपने टूटे हुए जज़्बातों को वह गानों की शक्ल में अपनी डायरी में लिखती है। वह अपने दर्द को भुलाने और एक नई शुरुआत करने के लिए एक मीडिया कंपनी में नौकरी के लिए पहुंचती है। इसी कंपनी में उसकी मुलाकात होती है क्रिश कपूर (अहान पांडे) से। क्रिश गुस्से में उस शख्स को मार देता है जिसने अपने आर्टिकल में क्रिश के म्यूजिक बैंड के बाकी मेंबर्स का नाम नहीं लिखा, सिर्फ एक खास म्यूजीशियन का नाम लिया, क्योंकि वो ‘नेपो किड’ (फिल्मी परिवार से) था।

क्रिश का सपना है कि वह म्यूजिक की दुनिया का बड़ा स्टार बने। इसी दौरान वो वाणी से गाने लिखवाने की गुज़ारिश करता है। धीरे-धीरे दोनों एक-दूसरे के करीब आते हैं, दोस्ती प्यार में बदल जाती है। लेकिन कहानी में एक बड़ा मोड़ तब आता है जब वाणी को पता चलता है कि उसे अल्ज़ाइमर नाम की बीमारी है, जिसमें इंसान धीरे-धीरे अपनी यादें खोने लगता है। अब वाणी को पता है कि एक दिन वह सब कुछ भूल जाएगी — अपना प्यार, अपना अतीत और शायद खुद को भी।

अब सवाल ये है – क्या क्रिश अपने प्यार को थामे रखेगा या अपने सुपरस्टार बनने के सपने को पूरा करने निकलेगा? इसका जवाब जानने के लिए आपको फिल्म देखनी होगी।

देखी-सुनी सी कहानी, लेकिन पेशकश दिल से की गई है

इस फिल्म की कहानी और स्क्रीनप्ले संकल्प सदाना ने लिखी है। अगर कहानी की बात करें तो यह एकदम नई नहीं लगती। इस तरह की कहानी हमने पहले भी रॉकस्टार और आशिकी 2 जैसी फिल्मों में देखी है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि फिल्म बोर करती है। मोहित सूरी का दमदार निर्देशन, फिल्म का दिल छू लेने वाला म्यूजिक, विकास सिवरमन की शानदार सिनेमैटोग्राफी और जॉन स्टेवर्ट एडुरी का जबरदस्त बैकग्राउंड म्यूजिक – ये सब मिलकर फिल्म को खास बना देते हैं।

फिल्म में काम करने वाले नए कलाकारों अहान और अनीत की एक्टिंग भी काफी असरदार है। उन्होंने अपने रोल को दिल से निभाया है। यही वजह है कि फिल्म एक अच्छी रोमांटिक फिल्म की लिस्ट में आ जाती है। वैसे भी जब बात रोमांटिक फिल्मों की आती है, तो मोहित सूरी का नाम सबसे ऊपर लिया जाता है। आवारापन, आशिकी 2 और एक विलेन जैसी फिल्मों से उन्होंने ये साबित किया है।

इस फिल्म में भी मोहित सूरी ने अपने डायरेक्शन से एक बार फिर जादू चलाया है और नए एक्टर्स से बेहतरीन काम करवाया है। फिल्म में एक डायलॉग है — “जो गाने दिल को छूते हैं, वो ऐसे ही थोड़ी लिखे जाते हैं।” यह लाइन दिल पर असर करती है।

गीतकार इरशाद कामिल, मिथुन, राज शेखर और ऋषभ कांत के लिखे गाने सीधे दिल में उतरते हैं। वहीं देवेंद्र मुर्देश्वर और रोहित मकवाना की एडिटिंग फिल्म को बांधे रखती है, कहीं बोर नहीं होने देती। फिल्म में ‘सैयारा’ शब्द का मतलब बहुत ही खूबसूरती से बताया गया है। अनीत का किरदार कहता है – “सैयारा वो सितारा होता है जो आसमान में अकेला भटकता है, लेकिन अपनी चमक से दूसरों की जिंदगी रौशन करता है।” इस मायने में फिल्म के दोनों कलाकार – अनीत और अहान – सच में सैयारा की तरह नजर आते हैं। अपने अभिनय से उन्होंने इस फिल्म को खास बना दिया है।

फिल्म में क्रिश (अहान पांडे) का किरदार सोशल मीडिया पर नेपो किड्स को लेकर बनी छवि से चिढ़ता है, लेकिन असल जिंदगी में अहान खुद एक नेपो किड हैं – वो अभिनेत्री अनन्या पांडे के चचेरे भाई हैं। फिर भी, इस साल अब तक जितने भी स्टार किड्स लॉन्च हुए हैं, उनमें अहान सबसे अलग और बेहतर नज़र आते हैं। खासकर इमोशनल सीन में उनका अभिनय काफ़ी असरदार है। क्लाइमैक्स में जब वो वाणी को उसका नाम याद दिलाते हैं, तो वो पल दिल को छू जाता है।

Saiyaara Review: नेपो किड होकर भी छा गए अहान, जानें क्यों देखनी चाहिए ये फिल्म
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वाणी के किरदार के लिए जो मासूमियत चाहिए थी, वो अनीत पड्डा ने बखूबी निभाई है। सलाम वेंकी में काम कर चुकीं अनीत इस फिल्म में पूरी तरह लीड रोल में हैं और उन्होंने ये जिम्मेदारी बहुत अच्छे से निभाई है।

क्रिश के दोस्त केवी के रोल में आलम खान भी अच्छा काम करते हैं, लेकिन उनका किरदार थोड़ा और गहराई से लिखा जा सकता था। वहीं, राजेश कुमार, वरुण बडोला और गीता अग्रवाल जैसे सीनियर कलाकार भी अपने रोल में खूब जमे हैं।

सबसे खास बात ये रही कि लंबे समय बाद सुबह के पहले शो में भी थिएटर में काफी दर्शक देखने को मिले। और जब फिल्म खत्म होती है, तो ‘सैयारा…’ गाना दर्शकों के दिल और ज़ुबान पर रह जाता है।

अहान और अनीत की एक्टिंग से सजी दिल छूने वाली कहानी

फिल्म में ‘सैयारा’ शब्द का मतलब बहुत ही खूबसूरती से बताया गया है। अनीत का किरदार कहता है – “सैयारा वो सितारा होता है जो आसमान में अकेला भटकता है, लेकिन अपनी चमक से दूसरों की जिंदगी रौशन करता है।” इस मायने में फिल्म के दोनों कलाकार – अनीत और अहान – सच में सैयारा की तरह नजर आते हैं। अपने अभिनय से उन्होंने इस फिल्म को खास बना दिया है।

फिल्म में क्रिश (अहान पांडे) का किरदार सोशल मीडिया पर नेपो किड्स को लेकर बनी छवि से चिढ़ता है, लेकिन असल जिंदगी में अहान खुद एक नेपो किड हैं – वो अभिनेत्री अनन्या पांडे के चचेरे भाई हैं। फिर भी, इस साल अब तक जितने भी स्टार किड्स लॉन्च हुए हैं, उनमें अहान सबसे अलग और बेहतर नज़र आते हैं। खासकर इमोशनल सीन में उनका अभिनय काफ़ी असरदार है। क्लाइमैक्स में जब वो वाणी को उसका नाम याद दिलाते हैं, तो वो पल दिल को छू जाता है।

Saiyaara Review: नेपो किड होकर भी छा गए अहान, जानें क्यों देखनी चाहिए ये फिल्म
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वाणी के किरदार के लिए जो मासूमियत चाहिए थी, वो अनीत पड्डा ने बखूबी निभाई है। सलाम वेंकी में काम कर चुकीं अनीत इस फिल्म में पूरी तरह लीड रोल में हैं और उन्होंने ये जिम्मेदारी बहुत अच्छे से निभाई है।

क्रिश के दोस्त केवी के रोल में आलम खान भी अच्छा काम करते हैं, लेकिन उनका किरदार थोड़ा और गहराई से लिखा जा सकता था। वहीं, राजेश कुमार, वरुण बडोला और गीता अग्रवाल जैसे सीनियर कलाकार भी अपने रोल में खूब जमे हैं।

सबसे खास बात ये रही कि लंबे समय बाद सुबह के पहले शो में भी थिएटर में काफी दर्शक देखने को मिले। और जब फिल्म खत्म होती है, तो ‘सैयारा…’ गाना दर्शकों के दिल और ज़ुबान पर रह जाता है।

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